भारत के पहले राष्ट्रपति से लेकर अब तक की सूची (पूरी जानकारी )

भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहाँ शासन व्यवस्था संविधान के अनुसार चलती है। जब भी भारत की संवैधानिक व्यवस्था की बात होती है, तो राष्ट्रपति पद का नाम सबसे ऊपर आता है। राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक प्रमुख होता है और देश की एकता, अखंडता तथा लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में “भारत के पहले राष्ट्रपति से लेकर अब तक की सूची” एक ऐसा विषय है, जिससे सीधे तथ्यात्मक प्रश्न भी पूछे जाते हैं और कई बार विश्लेषणात्मक प्रश्न भी बनते हैं।
इस लेख में हम भारत के सभी राष्ट्रपतियों की पूरी सूची, उनका कार्यकाल, पृष्ठभूमि, योगदान और उनसे जुड़े परीक्षा-उपयोगी तथ्यों को सरल भाषा, अनुभव आधारित व्याख्या और उदाहरणों के साथ समझेंगे, ताकि यह विषय आपके लिए केवल याद करने का नहीं बल्कि समझने का बन जाए।

भारत में राष्ट्रपति पद का महत्व

भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है। संविधान के अनुसार कार्यकारी शक्तियाँ भले ही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास हों, लेकिन सभी सरकारी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर ही किए जाते हैं।
व्यवहारिक अनुभव बताता है कि राष्ट्रपति पद को समझे बिना भारतीय संविधान की संरचना को पूरी तरह समझ पाना कठिन है। राष्ट्रपति संसद का अंग होता है, सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है और आपातकाल जैसी परिस्थितियों में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

राष्ट्रपति का चुनाव और कार्यकाल

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं, बल्कि निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इस निर्वाचक मंडल में
लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य
तथा सभी राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन वह पुनः निर्वाचित हो सकता है।

भारत के राष्ट्रपतियों का संक्षिप्त इतिहास

1950 में जब भारत गणराज्य बना, तब से लेकर आज तक भारत को कई राष्ट्रपति मिले हैं। हर राष्ट्रपति की पृष्ठभूमि अलग रही है—कोई विद्वान था, कोई वैज्ञानिक, कोई राजनेता, तो कोई स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ व्यक्तित्व।
इन सभी ने अपने-अपने समय में राष्ट्रपति पद की गरिमा को बनाए रखा।

भारत के पहले राष्ट्रपति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद

डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे और संविधान सभा के अध्यक्ष भी रह चुके थे।
उनका व्यक्तित्व सरल, विद्वान और अनुशासित था।
अनुभव से देखा गया है कि परीक्षाओं में डॉ. राजेंद्र प्रसाद से जुड़े प्रश्न अक्सर “एकमात्र राष्ट्रपति जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए” जैसे तथ्यों पर आधारित होते हैं।

भारत के राष्ट्रपतियों की पूरी सूची

नीचे दी गई तालिका भारत के पहले राष्ट्रपति से लेकर अब तक के सभी राष्ट्रपतियों की पूरी और क्रमबद्ध सूची प्रस्तुत करती है, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।

क्रमराष्ट्रपति का नामकार्यकालविशेष पहचान
1डॉ. राजेंद्र प्रसाद1950–1962पहले राष्ट्रपति, दो कार्यकाल
2डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन1962–1967महान दार्शनिक
3डॉ. जाकिर हुसैन1967–1969पहले मुस्लिम राष्ट्रपति
4वी. वी. गिरि1969–1974पहले कार्यवाहक से निर्वाचित राष्ट्रपति
5फखरुद्दीन अली अहमद1974–1977आपातकाल के समय राष्ट्रपति
6नीलम संजीव रेड्डी1977–1982सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति
7ज्ञानी ज़ैल सिंह1982–1987पहले सिख राष्ट्रपति
8आर. डी. शर्माकार्यवाहक (1987)कार्यवाहक राष्ट्रपति
9आर. डी. शर्मा के बाद
9आर. डी. शर्मा (संक्षेप)
9आर. डी. शर्मा के स्थान पर
9आर. डी. शर्मा

(नोट: नीचे सही और पूर्ण तालिका दी जा रही है)

क्रमराष्ट्रपतिकार्यकाल
1डॉ. राजेंद्र प्रसाद1950–1962
2डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन1962–1967
3डॉ. जाकिर हुसैन1967–1969
4वी. वी. गिरि1969–1974
5फखरुद्दीन अली अहमद1974–1977
6नीलम संजीव रेड्डी1977–1982
7ज्ञानी ज़ैल सिंह1982–1987
8आर. डी. शर्मा1987–1992
9शंकर दयाल शर्मा1992–1997
10के. आर. नारायणन1997–2002
11डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम2002–2007
12प्रतिभा देवीसिंह पाटिल2007–2012
13प्रणब मुखर्जी2012–2017
14राम नाथ कोविंद2017–2022
15द्रौपदी मुर्मू2022–वर्तमान

यह तालिका बार-बार रिवीजन के लिए आदर्श है और लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में काम आती है।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का योगदान

डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक और शिक्षाविद थे।
उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को बदल सकती है।
उनके जन्मदिन को आज भी शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो उनके योगदान को दर्शाता है।

डॉ. जाकिर हुसैन और उनका अल्प कार्यकाल

डॉ. जाकिर हुसैन भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे।
दुर्भाग्यवश, उनका कार्यकाल पूरा नहीं हो सका क्योंकि कार्यकाल के दौरान ही उनका निधन हो गया।
परीक्षाओं में यह तथ्य कई बार पूछा जाता है।

वी. वी. गिरि: निर्दलीय राष्ट्रपति

वी. वी. गिरि भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे, जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए।
यह तथ्य भारतीय लोकतंत्र की विशेषता को दर्शाता है।

आपातकाल और फखरुद्दीन अली अहमद

फखरुद्दीन अली अहमद का कार्यकाल भारतीय राजनीति के सबसे विवादास्पद दौर से जुड़ा है।
1975 में आपातकाल की घोषणा उन्हीं के कार्यकाल में हुई।
अनुभव से देखा गया है कि परीक्षाओं में आपातकाल और राष्ट्रपति की भूमिका पर प्रश्न अवश्य आते हैं।

नीलम संजीव रेड्डी और ज्ञानी ज़ैल सिंह

नीलम संजीव रेड्डी सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति बने।
ज्ञानी ज़ैल सिंह पहले सिख राष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल भी ऐतिहासिक निर्णयों से जुड़ा रहा।

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम: जन-जन के राष्ट्रपति

डॉ. अब्दुल कलाम भारत के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक रहे।
वे एक वैज्ञानिक थे और उन्हें “मिसाइल मैन” कहा जाता है।
उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
परीक्षाओं में उनसे जुड़े प्रश्न अक्सर विज्ञान और शिक्षा के संदर्भ में पूछे जाते हैं।

प्रतिभा पाटिल और महिला नेतृत्व

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति थीं।
उनका निर्वाचन भारतीय लोकतंत्र में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक माना जाता है।

प्रणब मुखर्जी और संसदीय अनुभव

प्रणब मुखर्जी को भारतीय राजनीति का चलता-फिरता विश्वकोश कहा जाता था।
उनका प्रशासनिक और संसदीय अनुभव राष्ट्रपति पद की गरिमा को और बढ़ाता है।

राम नाथ कोविंद और सामाजिक पृष्ठभूमि

राम नाथ कोविंद एक साधारण सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले राष्ट्रपति थे।
उनका जीवन संविधान द्वारा प्रदत्त समान अवसरों का उदाहरण है।

द्रौपदी मुर्मू: वर्तमान राष्ट्रपति

द्रौपदी मुर्मू भारत की वर्तमान राष्ट्रपति हैं और वे आदिवासी समुदाय से आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।
यह तथ्य भारतीय लोकतंत्र की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम माने जाते हैं।
पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल थीं।
वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हैं।

राष्ट्रपति पद और भारतीय लोकतंत्र

राष्ट्रपति पद भारतीय लोकतंत्र का एक स्थिर स्तंभ है।
यह पद राजनीति से ऊपर रहकर संविधान की रक्षा करता है।
यही कारण है कि राष्ट्रपति को “संविधान का संरक्षक” भी कहा जाता है।

निष्कर्ष

भारत के पहले राष्ट्रपति से लेकर अब तक की सूची केवल नामों का क्रम नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक विकास की कहानी है।
हर राष्ट्रपति ने अपने-अपने समय में इस पद की गरिमा को बनाए रखा और संविधान की मर्यादा का पालन किया।
यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह विषय न केवल स्कोर बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि आपको भारत की संवैधानिक यात्रा को समझने का अवसर भी देगा।